ये ज़ुल्म हम पे न ढाओ शजर ख़ुदा के लिए

हमें न छोड़ के जाओ शजर ख़ुदा के लिए

मैं कब से गिर्या-कुनाँ हूँ तुम्हारी मय्यत पर
उठो गले से लगाओ शजर ख़ुदा के लिए

तबाहियों के अँधेरा में साँस घुटती है
चराग़-ए-अम्न जलाओ शजर ख़ुदा के लिए

अज़िय्यतों के सिवा ज़िंदगी में कुछ भी नहीं
अमाँ में मौत की जाओ शजर ख़ुदा के लिए

लहू से सींच के इस दश्त-ए-बे-वफ़ाई को
शजर वफ़ा के लगाओ शजर ख़ुदा के लिए

— Shajar Abbas

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