लुत्फ़ लेने लगे हैं सब मुझ मेंक्या नज़र आ गया है अब मुझ मेंएक उस के सिवा हैं सब मेरेएक मेरे सिवा हैं सब मुझ मेंमैं तो जीने का शौक़ रखता थाहौसला पर नहीं है अब मुझ मेंदर-ब-दर हो गया हूँ मैं जब सेकर गई घर तेरी तलब मुझ में— Sumit Panchal