मेरी चाय ज़रा फीकी है बाकी तो सब बढ़िया है
इक लड़की मुझ से रूठी है बाकी तो सब बढ़िया है
गांव से चिट्ठी आई है जिस
में यारों ने लिखा है
कल उस लड़की की शादी है बाकी तो सब बढ़िया है
हाँ वो तो जो भी करती है सब कुछ होता है ठीक
एक मेरी ही तो ग़लती है बाकी तो सब बढ़िया है
जब उस की तस्वीर को देखा मां ने , हस के बोली
कुछ ये ज़ियादा ही भोली है बाकी तो सब बढ़िया है
बूढ़े पेड़ हटाए घर से थोड़ी जगह बनाई
सो अब धूप सी कुछ लगती है बाकी तो सब बढ़िया है
— BR SUDHAKAR















