उस जगह इंक़िलाब आते रहेवो जहाँ बे-नक़ाब आते रहेआप की नीम-बाज़ आँखों सेरिंद पीने शराब आते रहेदीद की हसरतें न थी दिल मेंक्यूँ तिरे रोज़ ख़्वाब आते रहेयाद का चश्मा रात उतरा जबआँखों में धुँधले ख़्वाब आते रहेहाथ काँटों से हो गए ज़ख़्मीख़त में सूखे गुलाब आते रहे— Tarun Bharadwaj