होश की ख़्वाहिश में कोई बे-ख़ुदी से डर गया
मय-कदे में रहने वाला मयकशी से डर गया
क्या ख़ता मुझ से हुई रूठे हैं मुझ से क्यूँ परिंद
आइने में ख़ुद को देखा मैं ख़ुदी से डर गया
शहर की आबो-हवा में ख़ौफ़ पसरा इस क़दर
ज़िंदगी की आरज़ू में ज़िंदगी से डर गया
— Tarun Bharadwaj















