
ख़ुदा का ज़िक्र है वाइज़ की पारसाई है
अगरचे धूम वहाँ रिंदों ने मचाई है
चला है जोश में मक़्तल की ओर जोशीला
उसी को देख के कितनों को अक़्ल आई है
हवा से लौटेंगे उतरेगा जब नशा सबका
ये कह के रिंद ने मय की हँसी उड़ाई है
— Tarun Bharadwaj
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