बेबसी के दौर में क्या मुस्कुराना छोड़ दें

तुम नहीं आए तो हम सजदे में आना छोड़ दें

आँधियों का रुख़ हमारी ओर है बेशक रहे
ये नहीं होगा कि हम दीपक जलाना छोड़ दें

हम ने अपनी आस्तीनों को खुला रहने दिया
अब हमारे साँप भी तो फुसफुसाना छोड़ दें

ये नहीं होगा भले ही जंग छिड़ जाए अभी
हम किसी के ख़ौफ़ से खाना कमाना छोड़ दें

हम ज़माने से ख़फ़ा है इस का ये मतलब नहीं
आप के हाथों में हम सारा ज़माना छोड़ दें

दुश्मनी यारी में बदली है हमारी आज ही
हम तुम्हें क्यूँ आज से ही आज़माना छोड़ दें

— Tarun Bharadwaj

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Khafa Shayari

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