बताओ याद आता है पुराना वो ज़माना क्यातुम्हारी शाम थी जिन में वही दिल का फ़साना क्याया तुम भी भूल बैठे हो सुनाए वो सभी क़िस्सेमुलाक़ातें हसीं रातें झुकी पलकें उठाना क्या— Atul Yadav Nirbhay