ik aise shaKHs ko mujhe apna banaana tha | इक ऐसे शख़्स को मुझे अपना बनाना था

  - Rahul

इक ऐसे शख़्स को मुझे अपना बनाना था
हर रोज़ जिसके पास नया इक बहाना था

लगता था मुझको हम हैं हमारे ही बीच में
लेकिन हमारे बीच में सारा ज़माना था

मुझको पता था रात में तारे ही गिनने हैं
बस उसको मेरे साथ में दिन ही बिताना था

घायल पड़ा हूँ मैं यहाँ वो तो चला गया
सय्याद था वो और मैं उसका निशाना था

तुझ सेे भी कोई पूछता होगा यूँँ ही कभी
कह देती होगी उस सेे कि झूठा फ़साना था

सौ काम थे मुझे कि न ये हो सका न वो
पहला था ये कि वक़्त भी मुझको कमाना था

अब तो गुज़र ही जाता हूँ देखे बिना उसे
उस गाँव में कभी मिरा अपना ठिकाना था

  - Rahul

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