khalish jigar men kashish nazar men yahii hai teraa meraa fasana | ख़लिश जिगर में कशिश नज़र में यही है तेरा मेरा फ़साना

  - Aamir Ali

ख़लिश जिगर में कशिश नज़र में यही है तेरा मेरा फ़साना
क़दम बढ़ा तू अदम की जानिब जहाँ से आया वहीं है जाना

तुम्हीं बता दो तुम्हीं जता दो नहीं चलेगा कोई बहाना
जहाँ मिले हम सदा खिले हम अगर हो ऐसा कोई ठिकाना

ख़िज़ाँ की रुत में ये ज़ेब-ओ-ज़ीनत गुलाब लहजा करे अदावत
पिघलते शीशे मचलते पत्थर दिखाए अंदाज़ आशिक़ाना

नसीब मेरा चमक उठा है क़दम क़दम पर मिला है रहबर
नए सफ़र पे निकल पड़ा हूँ भुला के अब वो मकाँ पुराना

निखारता है अदा-ए-वहशत तराशता है बला-ए-क़ुदरत
बना समुंदर ग़नी क़लंदर तेरा दिवाना लिखे तराना

  - Aamir Ali

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