यहाँ से वहाँ हो गए हम
फ़ुलाँ थे फ़ुलाँ हो गए हम
क़दम दो क़दम चलते चलते
कोई कारवाँ हो गए हम
गुमाँ है हमें होने का तो
बड़े बद-गुमाँ हो गए हम
खिला है नया फूल जब से
बशर बाग़बाँ हो गए हम
पढ़ी आयत-ए-इश्क़ तुम ने
यहाँ तर्जुमाँ हो गए हम
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