किसी को याद तड़पाए तुम्हें क्या
कोई मरता हो मर जाए तुम्हें क्या
तुम्हें सजने सँवरने से है मतलब
क़यामत आती हो आए तुम्हें क्या
अनल-हक़ की सदा देते हुए गर
कोई फिर सूली चढ़ जाए तुम्हें क्या
तुम्हारा हुस्न ये हम-आशिक़ों पर
ग़ज़ब ढाए सितम ढाए तुम्हें क्या
तुम्हें तो खेलना होता है दिल से
किसी की जाँ चली जाए तुम्हें क्या
अदास शानों पे गेसू बिखेरो
जहाँ भर में घटा छाए तुम्हें क्या
तुम्हारा काम छुप कर बैठ जाना
किसी की जाँ-ब-लब आए तुम्हें क्या
निगहबानी में हो 'आमिर' किसी के
करें कुछ भी ये हम-साए तुम्हें क्या
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