aaj bhi neend kii barsaat utarne kii nahin | आज भी नींद की बरसात उतरने की नहीं

  - Aatish Indori

आज भी नींद की बरसात उतरने की नहीं
बद-ख़यालात की बारात गुज़रने की नहीं

चाँद चुपचाप है तारे भी ख़फ़ा लगते हैं
गर यूँँ हालात है तो रात गुज़रने की नहीं

ख़ुश्क ख़ुशबू का पता सबको हवाएँ देंगी
ख़ाक होने से भी ये बात गुज़रने की नहीं

जिस्म से मेरे गुज़र के तेरे दर तक पहुँची
ज़ेहन से मेरे ये बारात गुज़रने की नहीं

  - Aatish Indori

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