halki sii aahat bhar se dil ka darwaaza khulta tha | हल्की सी आहट भर से दिल का दरवाज़ा खुलता था

  - Aatish Indori

हल्की सी आहट भर से दिल का दरवाज़ा खुलता था
एक ज़माना वो भी था जब मुझ पे पूरा खुलता था

थोड़ी खट-पट होती है तो दीवारें उठ जाती हैं
पहले बातें होती रहती थीं तो रस्ता खुलता था

जब से उसने 'इश्क़ किया है तब से दरिया बहता है
पहले आँखों में से जन्नत का दरवाज़ा खुलता था

बिन चिट्ठी-बिन तार के आते जाते थे तब संदेशे
उसने खिड़की गर खोली तो मेरा कमरा खुलता था

अच्छे से जाना करती थी वो कि मुझे क्या भाता है
मुझ सेे नज़रें टकराऍं तो उसका जूड़ा खुलता था

  - Aatish Indori

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