वैसी मुझ
में भी नज़ाकत न हो मुमकिन ही नहीं
उसको भी मुझ सेे मोहब्बत न हो मुमकिन ही नहीं
जब मोहब्बत की हवाओं के पड़ेंगे झोंके
तन-बदन में कोई हरकत न हो मुमकिन ही नहीं
जान-ए-जानाँ चुना है हम ने मोहब्बत का सफ़र
इस सफ़र में कोई दिक़्क़त न हो मुमकिन ही नहीं
आपके होने से बिखरी है मोहब्बत हर-सू
आपके हाथ में बरकत न हो मुमकिन ही नहीं
'उम्र भर राह वगरना नहीं तकते आशिक़
मौसम-ए-हिज्र में लज़्ज़त न हो मुमकिन ही नहीं
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