rishte aur tootenge gar ham jaayenge gehraai men | रिश्ते और टूटेंगे गर हम जाएँगे गहराई में

  - Aatish Indori

रिश्ते और टूटेंगे गर हम जाएँगे गहराई में
अच्छा यह है कि पक्का धागा डालें हम तुरपाई में

इस कारण से पूरे तन-मन-धन से तुमको चाहा है
सुन रक्खा है मैंने गौहर मिलते हैं गहराई में

हमको इक दूजे से मोहब्बत है यह तो जग-ज़ाहिर है
इक का चेहरा दिखता हो जब दूजे की परछाई में

कोई भी ऐतिराज़ नहीं है लानत देना है तो दो
लेकिन तुम सच जानोगे जब बैठोगे तन्हाई में

तुम जब ग़ुस्सा करते हो तो सुकून और बढ़ जाता है
जैसे कि धूप तेज़ हो और हम बैठे हों अमराई में

यूँँ तो कहने को लम्हे भर की बेवफ़ाई की उसने
लेकिन 'उम्र लगेगी अब इस धोके की भरपाई में

दोष नहीं है तेरा कुछ भी धोका मिलता रहता है
अच्छा-ख़ासा नक़्स रहा है बचपन से बीनाई में

  - Aatish Indori

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