तुम से लड़ के जो घर गया था मैं
फिर बिछड़ने से डर गया था मैं
जिस के दिल में धड़कता था हर पल
उस के दिल से उतर गया था मैं
सिर्फ मैं ही था लाश के नज़दीक
अपने काँधों पे घर गया था मैं
पूछती हो के क्या हुआ मिरे बाद
हर तरफ से बिखर गया था मैं
देख कर जब उसे रकी़ब के साथ
अपने अंदर ही मर गया था मैं
ऐसी तन्हाई खा गई थी मुझे
अपने साए से डर गया था मैं
लग गई ज़िन्दगी समेटने में
रेजा़ रेजा़ बिखर गया था मैं
क्या बताऊंँ कहानी का अंजाम
मर गई थी वो मर गया था मैं
Read Full