नहीं जाते हैं उस के पास मन से
कि वाक़िफ़ हैं ज़माने के चलन से
वो जिस के पास दिल गिरवी पड़ा है
बड़ी क़ीमत वसूलेगा बदन से
ख़ुशी है भूल जाने में अब उस को
वो जिस की याद आ जाती है छन से
कफ़न ओढ़े हुए क्या लग रही थी
फिर उस के बा'द क्या कहते दुल्हन से
कहीं ख़ंजर निकालेगा शिकारी
कही ख़ुशबू निकालेगा हिरन से
— Ankit Yadav















