vaqt jab mil jaa.e thoda sochna | वक़्त जब मिल जाए थोड़ा सोचना

  - Ankit Yadav

वक़्त जब मिल जाए थोड़ा सोचना
तुम मेरे बारे में अच्छा सोचना

मैंने थोड़ा ही लिखा है ख़त में दोस्त
थोड़ा पढ़ना और ज़्यादा सोचना

तुम सेे पहले अपनी फ़ितरत में न था
एक चेहरे को दुबारा सोचना
'इश्क़ का ये आख़िरी दस्तूर है
दूसरे के बाद पहला सोचना

हाँ बहुत बर्बाद कर देगा तुम्हें
टूटने के बाद सपना सोचना

  - Ankit Yadav

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