isee ik baat par to 'umr bhar ladta raha hooñ | इसी इक बात पर तो 'उम्र भर लड़ता रहा हूँ

  - Ankit Yadav

इसी इक बात पर तो 'उम्र भर लड़ता रहा हूँ
बता दे तू तिरा अपना नहीं तो और क्या हूँ

मुझे कोई शिकायत तो नहीं तुम से है लेकिन
न जाने किस लिए किस बात पर तुम से ख़फ़ा हूँ

कभी तो मेरा हिस्सा याद आएगा किसी को
मगर मैं पूछ लेता हूँ तो कहता है बुरा हूँ

वो अक्सर भूल जाता है मुझे मिलकर किसी से
मैं उसकी याद में भी याद से आता रहा हूँ

कभी मिलना जो तुम मुझ सेे तो फ़ोटो खींच लेना
मैं कुछ लोगों की ख़ातिर जाने कब से गुम-शुदा हूँ

  - Ankit Yadav

Promise Shayari

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