जो न आएगा मेरी चौखट पर
दिल मचलता है उस की आहट पर
जिस्म अपना उतार कर कोई
मिलने आता था दिल के पनघट पर
भरी महफ़िल में अपना कहता है
दिल भी आया तो ऐसे मुँह-फट पर
ऐसे बिस्तर पे रात काटी है
नींद सोई थी एक करवट पर
रौशनी मेरी कम नहीं होगी
चंद तारों की टिमटिमाहट पर
मिलने आना अगर तो दुनिया को
छोड़ देना हमारी चौखट पर
— Ankit Maurya















