पहले हम को सिखाई वफ़ा 'इश्क़ ने
और फिर कर दिया क्या से क्या 'इश्क़ ने
जितनी मैं ने निभाई वफ़ादारियाँ
हर क़दम उतना मुझ को छला 'इश्क़ ने
क्यूँ नहीं कहते आसान है ये सफ़र
दिन में तारे दिखाए हैं क्या 'इश्क़ ने
हर कोई पढ़ रहा है सबक़ 'इश्क़ का
खोल डाला है क्या मदरसा 'इश्क़ ने
मेरी आवारगी मेरी दीवानगी
मुझ को ये सब किया है अता 'इश्क़ ने
ख़्वाब में रात ग़ालिब ने फिर ये कहा
आप को भी निकम्मा किया 'इश्क़ ने
'इश्क़ ने ही मिलाया हमें बा-ख़ुदा
और फिर कर दिया ख़ुद जुदा 'इश्क़ ने
उस ने 'साहिल' सुखन में कमाया है नाम
शाइरी जिस को की थी अता 'इश्क़ ने
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