मान लीजे मुझे हक़ीर-ए-इश्क़

आप भी तो नहीं अमीर-ए-इश्क़

दिल भी घाइल है रूह भी घाइल
इस तरह मारा उस ने तीर-ए-इश्क़

ध्यान रखना के मुँह न जल जाए
आप पी तो रहे हैं शीर-ए-इश्क़

रोज़ फूले-फले ये इश्क़ की पौध
दे रहा है दुआ फ़क़ीर-ए-इश्क़

सीखिए इश्क़ की क़वाइद और
मारिए रोज़ आप तीर ए इश्क़

उम्र भर उस ने बे-वफ़ाई की
वो जो बैठा है बन के पीर-ए-इश्क़

— A R Sahil "Aleeg"

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