तमाम रात ये ढूँढा है ख़्वाब में क्या है
नहीं है चाँद अगर तो हिजाब में क्या है
कहा था मीर ने उनके लबों की नाज़ुकी देख
चमेली जूही महकते गुलाब में क्या है
किसी के लम्स से मालूम ये हुआ हमको
दहकते जलते हुए आफ़ताब में क्या है
ये बात कोई समझदार ही समझ पाया
इबारतों के अलावा किताब में क्या है
चुनाव कीजिये 'साहिल' गुलों की ख़ुशबू का
सरों के लाशों के इस इंतिख़ाब में क्या है
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