"वही जो"
वही जो ख़ूब-सूरत है बहुत वो
वही जो दिल में मेरे बस चुकी है
वही जो मुझ से तो कुछ भी न कहती
दिलों से बात करती है वो अक्सर
इशारे में मुझे कहती है सब कुछ
वही जो दिल की है अच्छी बहुत वो
मुझे यूँॅं पास में अपने सुलाती
मुझे वो रात को लोरी सुनाती
मेरे नख़रे ख़ुशी से झेलती है
वो अक्सर साथ मेरे खेलती है
मुझे संसार का राजा बुलाती
मैं रोता तो मुझे सीने लगाती
अगर मैं बोल सकता तो मैं कहता
हाँ तुम हो प्रेम की संगम मेरी माँ
मुझे कहती है तुम इक काम करना
बड़ा होकर के जग में नाम करना
ग़रीबों की सदा इज़्ज़त हाँ करना
ग़लत का साथ भी देना नहीं तुम















