mumkin agar ho KHvaab ka paikar taraashiye | मुमकिन अगर हो ख़्वाब का पैकर तराशिए

  - Dharmesh bashar

मुमकिन अगर हो ख़्वाब का पैकर तराशिए
शीशों को छोड़ दीजिए पत्थर तराशिए

जिसकी ख़मोशियों पे ख़ुदा का गुमान हो
ऐसा कोई सनम कोई दिलबर तराशिए

सदियों से ज़िन्दगी के लबों पे जमी है प्यास
पत्थर निचोड़िए कोई साग़र तराशिए

इस दश्त में बहुत है ख़याल-ए-सराब भी
पानी नहीं तो अब्र का मंज़र तराशिए

इस दौर को भी चाहिए इरफ़ान-ओ-आगही
इस दौर में भी कोई पयंबर तराशिए

सहरा-ए-ज़िन्दगी का मुक़द्दर है तिश्नगी
शबनम तराशिए कि समंदर तराशिए

बे-पर्दा हो न जाए कहीं राज़-ए-दिल 'बशर'
यारों ज़रा ख़याल के भी पर तराशिए

  - Dharmesh bashar

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