ye tamasha nahin achha ye tamasha na karo | ये तमाशा नहीं अच्छा ये तमाशा न करो

  - Dharmesh bashar

ये तमाशा नहीं अच्छा ये तमाशा न करो
ख़ुद को हर बात पे यूँँ आग बबूला न करो

ज़ेहन पर तारी मुसलसल ये अँधेरा है और
ये गुज़ारिश भी कि अब घर में उजाला न करो

बे-वफ़ा कह के उसे शहर में कर दें बदनाम
दिल ये मजबूर है कहता है कि ऐसा न करो

ग़म में दो लफ़्ज़ तसल्ली के तो कह सकते हैं
ख़ैर अब आप हमारे लिए इतना न करो

ख़ौफ़ रुसवाई का गर है तो भुला दो मुझको
नाम भी मेरा न लो ज़िक्र भी मेरा न करो

तीर खींचोगे मिरे दिल से तो मर जाऊँगा
बे-नियाज़ी से मिरे दर्द का चारा न करो

इस कड़ी धूप में है कौन किसी का साथी
अपने साए का भी इस वक़्त भरोसा न करो

हमने तो सोचा है अब तर्क-ए-तमन्ना का 'बशर'
दिल की चाहत है मगर तर्क-ए-तमन्ना न करो

  - Dharmesh bashar

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