hai ye dariyaa kabhi ghatta paani | है ये दरिया कभी घटा पानी

  - Dharmesh bashar

है ये दरिया कभी घटा पानी
शक्ल बदले है क्या से क्या पानी

मौज इक आई जब समुंदर की
रेत पर प्यास लिख गया पानी

हैं मुरत्तब वजूद में कैसे
आग मिट्टी फ़लक हवा पानी

क़द्र पहले ज़मीं पे वो कर ले
जो ख़लाओं में ढूँढता पानी

शक ही होता है 'इश्क़ का क़ातिल
जैसे बुनियाद में भरा पानी

अब भी रोना बचा उन आँखों में
जिन
में कुछ भी नहीं बचा पानी

हाल-ए-दिल हिज्र में बयाँ क्या हो
जैसे मछली से छिन गया पानी

ये ही मज़लूम की गवाही है
आँख से जो टपक रहा पानी

हुस्न का मय जो पी रहा हूँ मैं
साक़िया इस
में मत मिला पानी

  - Dharmesh bashar

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