उनका दिल आमादा-ए-मेहर-ओ-वफ़ा कैसे हुआ
क्या कहूँ ये ख़ूबसूरत हादसा कैसे हुआ
मुझको हैरत है कि ऐसा क्यूँ हुआ कैसे हुआ
वो जो कल तक अजनबी था आश्ना कैसे हुआ
किसको फ़ुर्सत है जो इस बारे में भी पूछे ज़रा
ये हमारा शहर आख़िर कर्बला कैसे हुआ
अब्र-ए-रहमत जिसका दरिया ही तलक महदूद है
वो ख़ुदा प्यासी ज़मीनों का ख़ुदा कैसे हुआ
जो हमेशा तोड़ने आए हैं आईनों के दिल
आइना उन पत्थरों का हम-नवा कैसे हुआ
लफ़्ज़ों के बाज़ीगरों से पूछना ये भी 'बशर'
बा-वफ़ा तब्दील हो कर बे-वफ़ा कैसे हुआ
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