नज़र में है रक़्साँ सितारों की दुनिया
अभी तक वही है नज़ारों की दुनिया
ये ज़ुल्फ़ों के बादल ये साँसों की ख़ुशबू
तिरा जिस्म ख़ुद है बहारों की दुनिया
निगाहें मिरी आज भी ढूँढती हैं
वो मस्ती में डूबी इशारों की दुनिया
बयाँ कर रहा है सफ़ीने का आलम
ख़मोशी में डूबी किनारों की दुनिया
न साक़ी न साग़र न वो क़हक़हे हैं
है सुनसान अब मय-गुसारों की दुनिया
जो भटके ग़मों के अँधेरों में उनका
सहारा बनी माहपारों की दुनिया
न जीने की ख़्वाहिश न मरने का अरमाँ
'अजब है 'बशर' जाँ-निसारों की दुनिया
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