हालत-ए-दिल सॅंभल नहीं सकती
अब वो दिल से निकल नहीं सकती
'उम्र भर 'इश्क़ करने वाला हूॅं
मेरी बर्बादी टल नहीं सकती
जाल में ऐसा फॅंस गया हूॅं मैं
अब ये मछली उछल नहीं सकती
मैं अगर दुनिया छोड़ जाऊॅं तो
क्या कमी मेरी खल नहीं सकती
मैं नहीं मान सकता तुम मेरे हो
हर ग़लत-फ़हमी पल नहीं सकती
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