हाथ में कभी छुरा कभी गुलाब रखता है
एक शख़्स मेरी मौत ला-जवाब रखता है
रस है मीठा मीठा सा नशा भी बेहतरीन है
लब पे शहद है पर आँखों में शराब रखता है
वैसे उसको खेलना पसंद है उजालों से
सो चराग़ फेंककर वो आफ़ताब रखता है
लोग उस सेे मिलते है तो चेहरा देख पाते हैं
क्या करें हमारे वक़्त वो हिजाब रखता है
चेहरे से नहीं समझता उसको किस सेे 'इश्क़ है
शख़्स बेवफ़ा हो तो कई नक़ाब रखता है
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