nayi nayi sii hai ye aaspaas kii khushboo | नई नई सी है ये आसपास की खु़श्बू

  - Bhuwan Singh

नई नई सी है ये आसपास की खु़श्बू
तिरे बदन पे है किसके लिबास की खु़श्बू

पसंद क्यूँ नहीं तुझको बस एक से रिश्ता
पसंद क्यूँ है तुझे सौ पचास की खु़श्बू

शराब यूँॅंही नहीं कहते उन लबों को लोग
जनाब अब भी है क़ायम गिलास की खु़श्बू

वो जाने कितनों के नज़दीक हो गया है अब
अब अच्छी लगती नहीं उसके पास की खु़श्बू

ख़ुदा को भूल के जो लोग घर बनाते हैं
ख़ुदा ही छीनता है उन निवास की खु़श्बू

किसी का ध्यान नहीं था तो दरिया सूख गया
यहाँ तो रह गई है महज़ प्यास की खु़श्बू

  - Bhuwan Singh

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