नई नई सी है ये आसपास की खु़श्बू
तिरे बदन पे है किसके लिबास की खु़श्बू
पसंद क्यूँ नहीं तुझको बस एक से रिश्ता
पसंद क्यूँ है तुझे सौ पचास की खु़श्बू
शराब यूँॅंही नहीं कहते उन लबों को लोग
जनाब अब भी है क़ायम गिलास की खु़श्बू
वो जाने कितनों के नज़दीक हो गया है अब
अब अच्छी लगती नहीं उसके पास की खु़श्बू
ख़ुदा को भूल के जो लोग घर बनाते हैं
ख़ुदा ही छीनता है उन निवास की खु़श्बू
किसी का ध्यान नहीं था तो दरिया सूख गया
यहाँ तो रह गई है महज़ प्यास की खु़श्बू
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