तस्वीर बनाता हूँ तो क़ीमत नहीं मिलती
मैं एक मुसव्विर हूँ सो इज़्ज़त नहीं मिलती
सोने के लिए ज़िंदगी ने दे दिया बिस्तर
ख़्वाबों के लिए अब भी इजाज़त नहीं मिलती
बरसात में कच्चे घरों को देख के सोचा
क्या होता है फिर उस का जिसे छत नहीं मिलती
वो दिखने में बेहतर है जिसे देखता हूँ मैं
ख़्वाबों से मेरे तेरी तो सूरत नहीं मिलती
मैं कैसे तेरे हुस्न का दीदार करूँगा
ख़ुदस ही तो मुझ को कभी फ़ुर्सत नहीं मिलती
मुझ को बता तू कैसे मेरे साथ रहेगा
जब तेरी मेरी एक भी आदत नहीं मिलती
लेता हूँ सहारा मैं दवा और दुआ का
पर तुझ से मिले ज़ख़्म से राहत नहीं मिलती
क़िस्मत में मेरी वो नहीं है जानता हूँ मैं
ख़ैरात में भी मुझ को मोहब्बत नहीं मिलती
था एक कहानी में 'भुवन' नाम का किरदार
आख़िर में तो यार उस को भी औरत नहीं मिलती















