tasveer banata hooñ to qeemat nahin milti | तस्वीर बनाता हूँ तो क़ीमत नहीं मिलती

  - Bhuwan Singh

तस्वीर बनाता हूँ तो क़ीमत नहीं मिलती
मैं एक मुसव्विर हूँ सो इज़्ज़त नहीं मिलती

सोने के लिए ज़िंदगी ने दे दिया बिस्तर
ख़्वाबों के लिए अब भी इजाज़त नहीं मिलती

बरसात में कच्चे घरों को देख के सोचा
क्या होता है फिर उसका जिसे छत नहीं मिलती

वो दिखने में बेहतर है जिसे देखता हूँ मैं
ख़्वाबों से मेरे तेरी तो सूरत नहीं मिलती

मैं कैसे तेरे हुस्न का दीदार करूँँगा
ख़ुदस ही तो मुझको कभी फ़ुर्सत नहीं मिलती

मुझको बता तू कैसे मेरे साथ रहेगा
जब तेरी मेरी एक भी आदत नहीं मिलती

लेता हूँ सहारा मैं दवा और दुआ का
पर तुझ सेे मिले ज़ख़्म से राहत नहीं मिलती

क़िस्मत में मेरी वो नहीं है जानता हूँ मैं
ख़ैरात में भी मुझको मोहब्बत नहीं मिलती

था एक कहानी में 'भुवन' नाम का किरदार
आख़िर में तो यार उसको भी औरत नहीं मिलती

  - Bhuwan Singh

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