सादा सा शख़्स हूँ मैं अंदर न इक गुमाँ है
उलफ़त सिखा ही दूँगा उर्दू मेरी ज़बाँ है
ज़र्रा भी शक न कर तू ऐ जान इस वफ़ा पर
तू ही है दिल की धड़कन तू ही मेरी जहाँ है
पहले बना के अपना रक्खूँगा तुझ को ला कर
इस शहर में मेरी भी छोटी सी इक मकाँ है
तू हर किसी को जानाँ ये चीज़ मत दिखा बस
तेरे गले पे मेरे लब के निशाँ यहाँ है
ये होंठ लाल क्यूँ है मत कर सवाल 'दानिश'
उस की शरारतें हैं जो होंठ पे निशाँ है
— Danish Balliavi















