Meaning of

क़ाफ़िर

qaafir • کافر

अविश्वासी; नास्तिक

infidel; non-believer

کافر; بے ایمان

Arabic

नज़्म-शेरो-शायरी तो बद-दिलों की बात है
झेलना तूफ़ाँ अभी क्या साहिलों की बात है

ज़ख़्म देकर क़त्ल तो काफ़िर सभी करते मगर
बा-मोहब्बत क़त्ल माहिर क़ातिलों की बात है

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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

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इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है
मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है

अपनी सोचो क़त्ल तुम्हें करना भी है
बन्दे का तो क्या है बन्दा हाज़िर है

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जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते
मोहब्बत दीन होती है वफ़ा ईमान होती है

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कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी
कुछ मुझे भी ख़राब होना था

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एक काफ़िर से मोहब्बत जो की मैं ने
मुफ़्ती-ए-दीं ने मुझे दीं से निकाला

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वो मुसाफ़िर कहाँँ गया जानी
यार क़ाफिर कहाँँ गया जानी

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माना कि आज भी मैं पढ़ती नहीं नमाज़
लेकिन ख़ुदा क़सम काफ़िर नहीं हूँ मैं

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अगर तुम पास बैठो शे'र उस को इक सुना देना
उसे अच्छा लगे तो एक दो ग़ज़लें भी गा देना

अगर वो पूछ ले तुम से कि ये जज़्बात किस के हैं
बताना एक शाइ'र नाम तुम काफ़िर बता देना

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डूब कर तेरी आँखों में मैं ने जहाँ देखा है
तुझ सेे ज़्यादा हसीं भी किसी ने कहाँ देखा है

मैं बताऊँ उन्हें जो बताते ख़ुदा है नहीं
होता है मैं ने देखा है काफ़िर यहाँ देखा है

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नज़्म-शेरो-शायरी तो बद-दिलों की बात है
झेलना तूफ़ाँ अभी क्या साहिलों की बात है

ज़ख़्म देकर क़त्ल तो काफ़िर सभी करते मगर
बा-मोहब्बत क़त्ल माहिर क़ातिलों की बात है

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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

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'क़ाफ़िर' शब्द धार्मिक और अस्तित्वगत विद्रोह का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर आध्यात्मिक विद्रोह, विश्वास पर सवाल उठाने, और अलग खड़े होने के साहस के विषयों की खोज करता है।

कवि 'क़ाफ़िर' का उपयोग संदेह और विद्रोह के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह विश्वास और भक्ति के शब्दों के विपरीत होता है, विश्वास और संदेह के बीच तनाव को उजागर करता है।

काव्यिक परिदृश्य में, 'क़ाफ़िर' विश्वास की सीमाओं को चुनौती देता है, आत्मनिरीक्षण और साहस को आमंत्रित करता है।