Meaning of

क़ुर्ब

qurb • قرب

निकटता; समीपता; आत्मीयता

closeness; proximity; intimacy

قربت; نزدیکی; محبت

Arabic

मैं न छोड़ूँगा ज़मीं इस मुल्क हिंदुस्तान की
ज़िंदा ये ईमान है मेरे वतन तेरे लिए

दिल फ़िदा है सब फ़िदा है नाम हिंदुस्तान पर
जान भी क़ुर्बान है मेरे वतन तेरे लिए

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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ
उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी

मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

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काम आया तिरंगा कफ़न के लिए
कोई क़ुर्बां हुआ था वतन के लिए

सोचो क्या कर लिया तुम ने जी कर के दोस्त
नस भी काटी तो बस इक बदन के लिए

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जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए
हम ख़ुश हुए इतने कि परेशाँ नज़र आए

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बातचीत में आला हो बस ठीक न हो
फ़ाइदा क्या महबूब अगर बारीक न हो

हम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैं
दरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो

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है आप के होंटों पे जो मुस्कान वग़ैरा
क़ुर्बान गए उस पे दिल ओ जान वग़ैरा

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भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है
ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई

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सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की

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इक पल का क़ुर्ब एक बरस का फिर इंतिज़ार
आई है जनवरी तो दिसम्बर चला गया

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कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की

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मैं न छोड़ूँगा ज़मीं इस मुल्क हिंदुस्तान की
ज़िंदा ये ईमान है मेरे वतन तेरे लिए

दिल फ़िदा है सब फ़िदा है नाम हिंदुस्तान पर
जान भी क़ुर्बान है मेरे वतन तेरे लिए

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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ
उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी

मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है
उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

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मूल रूप से 'क़ुर्ब' का अर्थ है शारीरिक या भावनात्मक निकटता, एक ऐसा समीपता जो केवल दूरी से परे है। कविता में, यह शब्द अक्सर अंतरंग संबंधों की गर्माहट को दर्शाता है, चाहे वह प्रेमियों के बीच हो, दोस्तों के बीच हो, या ईश्वर के साथ हो। यह आराम और अपनापन का एहसास कराता है, साझा पलों और आपसी समझ का कोमल स्मरण कराता है।

'क़ुर्ब' का उपयोग कवि अक्सर प्रेमियों के बीच कोमल निकटता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह ईश्वर के साथ आध्यात्मिक निकटता को भी दर्शा सकता है। यह शब्द 'फ़िराक़' के विपरीत है, जो अलगाव को दर्शाता है।

कविता की दुनिया में, 'क़ुर्ब' एक कोमल आलिंगन है, एकता की फुसफुसाहट। यह उन बंधनों की बात करता है जो दूरी को नकारते हैं।