Meaning of

मय्यत

mayyat • میت

अंतिम संस्कार; शव

funeral; corpse

جنازہ; لاش

Arabic

मीत मेरे नाम में आधा तुम्हारा नाम है
कृष्ण मेरा नाम है राधा तुम्हारा नाम है

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अहमियत अब तेरी कॉलर के बटन जितनी है
न हो तो भी कोई दिक़्क़त नहीं हो भी तो भी

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वो बुझ गया तो चला उस की अहमियत का पता
कि उस की आग से कितने चराग़ जलते थे

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सुख़न-फ़हमों की बस्ती में सुख़न की ज़िन्दगी कम है
जहाँ शाइ'र ज़ियादा हैं वहाँ पर शा'इरी कम है

मैं जुगनू हूँ उजाले में भला क्या अहमियत मेरी
वहाँ ले जाइए मुझ को जहाँ पर रौशनी कम है

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आदमिय्यत और शय है इल्म है कुछ और शय
कितना तोते को पढ़ाया पर वो हैवाँ ही रहा

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मैं अहमियत भी समझता हूँ क़हक़हों की मगर
मज़ा कुछ अपना अलग है उदास होने का

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पाँव रख गई है वो ज़मीन पर
अहमियत बढ़ा दी उस ने धूल की

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बाप के कांधे पे है बेटे की मय्यत
एक मय्यत ढो रही दूजे की मय्यत

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हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी'
ज़िन्दगी नाम है मर मर के जिए जाने का

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हर रोज़ उठाता हूँ किसी ख़्वाब की मय्यत
और आप ये कहते हैं कि मातम न करूँँ मैं

इक शख़्स दिखा दो मुझे हँसता हुआ दिल से
गोया कि ये सब देख के भी ग़म न करूँँ मैं

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मीत मेरे नाम में आधा तुम्हारा नाम है
कृष्ण मेरा नाम है राधा तुम्हारा नाम है

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अहमियत अब तेरी कॉलर के बटन जितनी है
न हो तो भी कोई दिक़्क़त नहीं हो भी तो भी

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'मय्यत' शब्द मृत्यु की गंभीरता और अंतिमता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर एक यात्रा के अंत का प्रतीक होता है, एक जीवन के बाद की खामोशी। यह क्षति और मृत्यु की अनिवार्यता का भार वहन करता है।

'मय्यत' का उपयोग कवि हानि और शोक की थीम को खोजने के लिए करते हैं। यह अक्सर जीवन की नाजुकता पर विचार करते हुए छंदों में प्रकट होता है। यह शब्द सपनों या आशाओं के अंत के लिए एक रूपक के रूप में भी काम कर सकता है।

'मय्यत' की खामोशी में, कवि अस्तित्व की क्षणभंगुरता पर विचार करने के लिए एक गहन स्थान पाते हैं।