Meaning of

मेहबूब

mehboob • محبوب

प्रिय; प्रेमी; प्रियतम

beloved; sweetheart; dear one

محبوب; پیارا; عزیز

Arabic

इलाही ने मुझे है शोख़ दी महबूब ये आँखें
कभी मेरी नज़र से देख कितना ख़ूब-सूरत है

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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

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ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में
मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता

चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है
पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता

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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे

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मुहब्बत में समझदारी से अक्सर काम लेते हैं
कहीं महबूब वो कहते कहीं वो नाम लेते हैं

मचलता है कभी जो दिल करें बातें निगाहों से
इजाज़त धड़कने देतीं वो दिल को थाम लेते हैं

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मजबूरी में रक़ीब ही बनना पड़ा मुझे
महबूब रहके मेरी जो इज़्ज़त नहीं हुई

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अगर महबूब की आँखें है दुनिया
तो मेरे पास फिर दुनिया नहीं है

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बातचीत में आला हो बस ठीक न हो
फ़ाइदा क्या महबूब अगर बारीक न हो

हम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैं
दरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो

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मिरा नज़दीक से छू कर गुज़र जाना
पलट कर उस का मुझ को कहना महबूबा

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हज़ारों बार लिख लिख कर यही पैग़ाम करता है
तेरे चुंबन के बदले जान तेरे नाम करता है

मेरे महबूब मुझ को तेरे आँखों की क़सम है ये
तेरा महबूब तुझ को याद सुब्ह-ओ-शाम करता है

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इलाही ने मुझे है शोख़ दी महबूब ये आँखें
कभी मेरी नज़र से देख कितना ख़ूब-सूरत है

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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है
जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

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'मेहबूब' का मूल अर्थ है वह व्यक्ति जो अत्यधिक प्रिय या चहेता हो। कविता में इस शब्द ने प्रेम, तड़प और प्रशंसा की भावनाओं को गहराई से व्यक्त किया है। यह स्नेह और भावनात्मक बंधन की सुंदरता को दर्शाता है।

कवि अक्सर 'मेहबूब' का उपयोग प्रेम और इच्छा के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह एक अप्राप्य आदर्श या गहरे व्यक्तिगत संबंध का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द अक्सर अलगाव या हानि के शब्दों के साथ विपरीत होता है, जो स्नेह की क्षणभंगुर प्रकृति को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'मेहबूब' केवल एक शब्द नहीं है; यह भावना और तड़प का एक माध्यम है। यह मानव संबंध के सार को पकड़ता है।