Meaning of

क़रम

qaram • کرم

कृपा; दया; अनुग्रह

grace; kindness; favor

کرم; مہربانی; فضل

Arabic

बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब' तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं — Mirza Ghalib
सितम भी मुझ पे वो करता रहा करम की तरह वो मेहरबाँ तो न था मेहरबान जैसा था — Anwar Taban
'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज — Hasrat Mohani
तसद्दुक़ इस करम के मैं कभी तन्हा नहीं रहता कि जिस दिन तुम नहीं आते तुम्हारी याद आती है — Jaleel Manikpuri
शब जो होली की है मिलने को तिरे मुखड़े से जान चाँद और तारे लिए फिरते हैं अफ़्शाँ हाथ में — Mushafi Ghulam Hamdani
करम हैं आप के ही झूठे वादे के कि हँस देते हैं हम रोते रहें तो‌ भी — Nainsee Gupta 'Nayantara'

मूल रूप से, 'क़रम' एक दिव्य या महान कृपा को दर्शाता है, एक ऐसा दयालु कार्य जो बिना किसी अपेक्षा के प्रदान किया जाता है। कविता में, यह उस कोमलता को दर्शाता है जो साधारण को असाधारण में बदल देती है।

कवि अक्सर 'क़रम' का उपयोग प्रिय या दिव्य की उदारता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह कठोरता के विपरीत, गर्मजोशी और करुणा की भावना लाता है।

कविता की दुनिया में, 'क़रम' दया की शक्ति की एक कोमल याद दिलाता है।