Meaning of

क़हर

qahar • قہر

क्रोध; प्रकोप; दैवीय दंड

wrath; fury; divine punishment

قہر; غضب; الہی سزا

Arabic

वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर — Zafar Iqbal
वो छोड़ कर तन्हा हमें जो चल दिया हम भी चले ख़ुद को इकहरा छोड़ कर — Kanz Al Rida
दर्द के दरिया से इक रिश्ता निभाना रह गया मेरे बस में ख़ामुशी का क़हर ढाना रह गया — Rohit tewatia 'Ishq'
तू दूर जा के बैठा है तो इक क़यामत सी है गर तू पास होता यार तो क्या क़हर मुझ पे टूटता — Brajnabh Pandey
इश्क़ के नुक़्ते ने ढाया है जो कहर ज़िस्तो-क़ज़ा के ज़ेर-ज़बर ख़त्म हुए — A R Sahil "Aleeg"
हुआ करती है शैतानों के मज्लिस में ये सरगोशी भी अब अक्सर अजब ही कहर ढा रक्खा है नाम-ए-इश्क़ पर इन हुस्न वालों ने — A R Sahil "Aleeg"

क़हर प्रचंड, प्रबल क्रोध या दैवीय प्रतिशोध की शक्ति को समेटे हुए है। यह उन भावनाओं की तीव्रता को पकड़ता है जो विनाश या परिवर्तन की ओर ले जा सकती हैं।

कविता में, 'क़हर' अक्सर प्रकृति या भाग्य की विनाशकारी शक्ति का प्रतीक होता है। इसका उपयोग आत्मा के भीतर के उथल-पुथल या ब्रह्मांड द्वारा दिए गए अनिवार्य न्याय को व्यक्त करने के लिए किया जा सकता है।

क़हर हमें शक्ति की द्वैत प्रकृति की याद दिलाता है - विनाश और नवीनीकरण।