Meaning of

ज़र्फ़

zarf • ظرف

बर्तन; क्षमता; शिष्टता

container; capacity; elegance

برتن; صلاحیت; شائستگی

Arabic

जानते भी हो मुहब्बत की हक़ीक़त साथी ऐसी कम-ज़र्फ़ी छलक जाती है बुत-ख़ाने में — Rakesh Mahadiuree
तेरी बीवी का ज़र्फ़ सोचना कितना मुश्किल तू उस के सामने पराई औरत तकता है — Jagveer Singh
कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है — Natiq Lakhnavi
ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल — "Nadeem khan' Kaavish"
लहर का ज़र्फ़ जितना था, समुंदर के ही अंदर था जरा सी ख़ाक से मिल कर किनारों पे है दम तोड़ा — anupam shah
इतना कम-ज़र्फ़ न बन उस के भी सीने में है दिल उस का एहसास भी रख अपनी ही राहत पे न जा — Aitbar Sajid
वो दुनिया से बिल्कुल जुदा देखते हैं जो कम-ज़र्फ़ में हौसला देखते हैं — Dileep Kumar

'ज़र्फ़' मूल रूप से एक बर्तन या पात्र को संदर्भित करता है, जो कुछ धारण करने की क्षमता का प्रतीक है। कविता में, यह उस शिष्टता और गरिमा तक विस्तारित होता है जिसके साथ कोई अपने आप को या अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करता है।

कवि अक्सर 'ज़र्फ़' का उपयोग किसी पात्र की आंतरिक शक्ति और शिष्टता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह बाहरी दिखावे या परिस्थितियों के विपरीत हो सकता है, जो किसी के चरित्र की गहराई को उजागर करता है।

कविता में, 'ज़र्फ़' आंतरिक शक्ति और शिष्टता का रूपक बन जाता है। यह चरित्र के सच्चे सार पर चिंतन का आमंत्रण देता है।