
ख़ुदा भी देख ले गर ज़र्फ़ मेरा तो करेगा वाह
उन्होंने ख़ुद-कुशी कर ली जिन्हें था मुझ से आधा दुख
यही बस इक सहूलत आदमी होने पे है 'जगवीर'
कि औरत को ज़माने ने दिए हैं हम से ज़्यादा दुख
— Jagveer Singh
Other sher from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling