Meaning of

फकीर

fakeer • فقیر

भिक्षुक; संन्यासी

mendicant; ascetic

فقیر; زاہد

Arabic

ख़ुद से हो बे-ख़बर दर दर भटकते हैं
ऐसे फ़कीर हम जो घर भटकते हैं

ख़ुद से मिला करो कोई बहाने से
ख़ुद-आगही के कारण डर भटकते हैं

10

Download Image

अपने हाकिम की फ़कीरी पे तरस आता है
जो ग़रीबों से पसीने की कमाई माँगे

58

Download Image

बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

40

Download Image

इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है
मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है

गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ
हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है

36

Download Image

तुम्हारी गालियों का अब असर होता नहीं मुझ पर
ज़रा ही देर बैठा था मैं सोहबत में फकीरों की।

33

Download Image

हम फ़क़ीरों की सूरतों पे न जा
हम कई रूप धार लेते हैं

ज़िंदगी के उदास लम्हों को
मुस्कुरा कर गुज़ार लेते हैं

15

Download Image

मैं ने आ'साब को पत्थर का बना रक्खा है
एक दिल है कि जो बनता नहीं पत्थर जैसा

हम फ़क़ीरों को कभी रास न आया वरना
हम ने पाया था मुक़द्दर तो सिकंदर जैसा

15

Download Image

फ़क़ीरों से न पूछो तुम ख़ुदा ने क्या दिया उन को
ये वो बंदे हैं जिन को अब ख़ुदा से चोट लगती है

14

Download Image

फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है
अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले

13

Download Image

क्यूँ किया करते हो तुम ज़ुल्म मुसलसल हम पर
तुम हो इंसान तो फिर इस का हवाला दे दो

तुम को है नाज़ अमीरी पे तो सुन लो 'दानिश'
हम फ़क़ीरों को ज़रा एक निवाला दे दो

13

Download Image

ख़ुद से हो बे-ख़बर दर दर भटकते हैं
ऐसे फ़कीर हम जो घर भटकते हैं

ख़ुद से मिला करो कोई बहाने से
ख़ुद-आगही के कारण डर भटकते हैं

10

Download Image

अपने हाकिम की फ़कीरी पे तरस आता है
जो ग़रीबों से पसीने की कमाई माँगे

58

Download Image

'फकीर' शब्द एक ऐसी जीवनशैली की छवि प्रस्तुत करता है जो भौतिक संपत्ति से रहित है, आध्यात्मिक खोजों के प्रति समर्पित है। मूल रूप से, यह एक ऐसे व्यक्ति को दर्शाता है जो भिक्षा पर जीवन यापन करता है, लेकिन कविता ने इसे सत्य के खोजकर्ता के रूप में ऊँचा उठाया है, जो सादगी में समृद्धि और विनम्रता में ज्ञान पाता है।

कवि अक्सर 'फकीर' का उपयोग त्याग और ज्ञान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह आंतरिक शांति की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतीक है, सांसारिक इच्छाओं की अराजकता के विपरीत। यह शब्द अलगाव में पाई जाने वाली स्वतंत्रता की भावना को जागृत करता है।

कविता में, 'फकीर' कमी में प्रचुरता के विरोधाभास को समेटे हुए है, आत्मा की शांत यात्रा की समृद्धि का प्रमाण।