Meaning of

मुख़ालिफ़

mukhaalif • مخالف

विरोधी; प्रतिद्वंद्वी; विपरीत

opponent; adversary; contrary

مخالف; حریف; برعکس

Arabic

मुझ को किसी की ऐसी फ़ितरत नहीं पसंद
चीज़ों की जिन को सच में क़ीमत नहीं पसंद

मुझ को मुख़ालिफ़ों की रंजिश तो है क़ुबूल
लेकिन मुनाफ़िक़ों की क़ुर्बत नहीं पसंद

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हो मुख़ालिफ़ तो फिर आ जाओ खुले मैदान में
अपनी क़ुव्वत आज़माओ, धमकियाँ अंदर रखो

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ये ही सबब है मुख़ालिफ़ हैं अकरबा मेरे
मेरा मिज़ाज है सच बात मुँह पे बोलता हूँ

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हवा के हम-नशीं हाथों में अपने हाथ मलते हैं
चराग़ों की अगर ज़िद हो हवाओं में ही जलते हैं

बहादुर तो नहीं डरते किसी ऐसे मुख़ालिफ़ से
बहुत से फूल ऐसे हैं जो काँटों में ही पलते हैं

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हैं जो आईन मुहब्बत के मुख़ालिफ़ 'असलम'
पास होते नहीं दिल वालों के एवानों में

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कोई सूरज के मुख़ालिफ़ ही भला क्यूँ होगा
रौशनी से तो अदावत है फ़क़त उल्लू को

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हम को भी उस सेे प्यार हुआ इस जहान में
जो शख़्स बचपने से मुख़ालिफ़ था प्यार का

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खुलता नहीं है रस्ता मेरा
कैसे होगा गुज़ारा मेरा

अपने दर से न लौटा मुझ को
तू है तो है सहारा मेरा

उस क़े ख़त को जलाऊँ कैसे
उस में दिल तो जलेगा मेरा

मेरे मुख़ालिफ़ क्या कर लेंगे
बूढ़ा नहीं है जज़्बा मेरा

घर के अंदर ग़ुर्बत देखो
चादर का है साया मेरा

मेरी फ़कीरी पे हँसना मत
सोने का है काँसा मेरा

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सितम की घर से निकल के बाहर मुख़ालिफ़त कर
मुख़ालिफ़त कर क़दम क़दम पर मुख़ालिफ़त कर

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मुझ को मुख़ालिफ़ों की रंजिश तो है क़ुबूल
लेकिन मुनाफ़िक़ों की क़ुर्बत नहीं पसंद

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मुझ को किसी की ऐसी फ़ितरत नहीं पसंद
चीज़ों की जिन को सच में क़ीमत नहीं पसंद

मुझ को मुख़ालिफ़ों की रंजिश तो है क़ुबूल
लेकिन मुनाफ़िक़ों की क़ुर्बत नहीं पसंद

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हो मुख़ालिफ़ तो फिर आ जाओ खुले मैदान में
अपनी क़ुव्वत आज़माओ, धमकियाँ अंदर रखो

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'मुख़ालिफ़' शब्द मूल रूप से किसी व्यक्ति या वस्तु को दर्शाता है जो विरोध या विपरीतता में खड़ा होता है। काव्यात्मक रूप से, यह अक्सर प्रेम, विचारधारा या प्रकृति में विरोधी शक्तियों के बीच तनाव को पकड़ता है।

कवि 'मुख़ालिफ़' का उपयोग संघर्ष और द्वैत के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह हृदय और मस्तिष्क के बीच संघर्ष, या आदर्शों के टकराव को उजागर कर सकता है।

कविता में, 'मुख़ालिफ़' मानव अनुभव को आकार देने वाली सदैव उपस्थित द्वैतताओं की याद दिलाता है।