
खुलता नहीं है रस्ता मेरा
कैसे होगा गुज़ारा मेरा
अपने दर से न लौटा मुझ को
तू है तो है सहारा मेरा
उस क़े ख़त को जलाऊँ कैसे
उस में दिल तो जलेगा मेरा
मेरे मुख़ालिफ़ क्या कर लेंगे
बूढ़ा नहीं है जज़्बा मेरा
घर के अंदर ग़ुर्बत देखो
चादर का है साया मेरा
मेरी फ़कीरी पे हँसना मत
सोने का है काँसा मेरा
— Meem Alif Shaz















