Meaning of

मुताबिक़

mutaabiq • مطابق

अनुसार; के मुताबिक

according to; in accordance with

مطابق; کے مطابق

Arabic

मुताबिक तेरे जब किरदार हो जाए
सुखी ये मेरा तब संसार हो जाए

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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया
किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था

एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे
एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था

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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

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तुम्हारे ही मुताबिक़ क्यूँँ जिए जाएँ
मुहब्बत की है बेचा थोड़ी है ख़ुद को

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मुताबिक़ मैं हवा के आज चल के जा रहा हूँ अब
ख़बर क्या ये हवा कल भी मुवाफ़िक़ चल सकेगी क्या

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मर्ज़ी के मुताबिक़ कभी आने नहीं देते
हम हक़ भी कमाएँ तो कमाने नहीं देते

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मैं तुम्हारे ही मुताबिक क्यूँ चलूँगी
कौन हो तुम क्या हो मेरे ये बताओ

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बात तो है ख़ास ही अब वो बताएँ कैसे
सिर्फ़ ज़ाहिर हो निगाहों से छुपाएँ कैसे

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बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर

अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर

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सभी ग़मों के मुआफिक़ बना दिया है मुझे
मोहब्बतों के मुताबिक़ बना दिया है मुझे

सवाल करने लगा हूँ ख़ुदा की करनी पर
तुम्हारे ग़म ने मुनाफ़िक़ बना दिया है मुझे

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मुताबिक तेरे जब किरदार हो जाए
सुखी ये मेरा तब संसार हो जाए

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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया
किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था

एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे
एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था

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'मुताबिक़' शब्द किसी चीज़ के साथ सामंजस्य या अनुरूपता का भाव व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर आंतरिक भावनाओं और बाहरी परिस्थितियों के बीच के सामंजस्य या असामंजस्य को दर्शाता है।

'मुताबिक़' का प्रयोग कवि भाग्य और चुनाव के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत इच्छाओं और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच के तनाव को उजागर कर सकता है।

कविता में, 'मुताबिक़' स्वयं और संसार के बीच एक पुल का काम करता है, जो सामंजस्य और असामंजस्य पर चिंतन को आमंत्रित करता है।