Meaning of

क़बिज़

qabiz • قبض

कब्ज़; नियंत्रण; संयम

constipation; control; restraint

قبض; کنٹرول; ضبط

Arabic

हिस्से में इश्क़ मेरे क़ब्ज़े में इश्क़ है अब
हर चीज़ भाव में बस सस्ते में इश्क़ है अब

कॉपी किताब क्या है कहते हैं आज बच्चे
मैं ने कहा है इन के बस्ते में इश्क़ है अब

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हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है
तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब

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यहाँ से जाने की जल्दी किस को है तुम बताओ
ये सूटकेसों में कपड़े किस ने रखे हुए हैं

करा तो लूँगा इलाक़ा ख़ाली मैं लड़-झगड़ कर
मगर जो उस ने दिलों पे क़ब्ज़े किए हुए हैं

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लटकन झटकन ओढ़ मटकते एक परी का दिख जाना,
प्लेन गुजरने पर बचपन के ख़ुश होने सा लगता है!

बिन्दी, लिपस्टिक, चूड़ी, कंगन और किनारा साड़ी का,
लाल कलर पर कब्ज़ा अय हय कितना अच्छा लगता है!

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इस सोच का क़ब्ज़ा मेरे इदराक पे होना
अफ़लाक पे होने के लिए ख़ाक पे होना

दुनिया मुझे पूछे कि ये ख़ुशबू है किधर की
और मेरा ख़याल आप की पोशाक पे होना

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मुल्क तो मुल्क घरों पर भी है क़ब्ज़ा उस का
अब तो घर भी नहीं चलते हैं सियासत के बग़ैर

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तीर चलाओ आँख से लेकिन थोड़ा नर्मी बरतो तुम
जंग नहीं हारा हूँ फिर भी दिल पे कब्जा कर लो तुम

हर कोई दीवाना होकर तेरे आगे पीछे है
या'नी के इस हुस्न से अपने जो चाहो वो कर दो तुम

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ज़िंदगी है अपने क़ब्ज़े में न अपने बस में मौत
आदमी मजबूर है और किस क़दर मजबूर है

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मेरे चेहरे पे है क़ब्ज़ा उदासी का
ख़ुशी क्या होती है मुझ को नहीं मालूम

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मुझे भी लग गई बीमारी आख़िर इश्क़ की दोस्त
मिरे दिल पर भी कब्ज़ा कर लिया आख़िर किसी ने

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हिस्से में इश्क़ मेरे क़ब्ज़े में इश्क़ है अब
हर चीज़ भाव में बस सस्ते में इश्क़ है अब

कॉपी किताब क्या है कहते हैं आज बच्चे
मैं ने कहा है इन के बस्ते में इश्क़ है अब

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हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है
तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब

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मूल रूप में 'क़बिज़' का अर्थ है शारीरिक स्थिति, जहाँ कुछ रुका हुआ या बाधित होता है। कविता में, यह शब्द भावनात्मक या आध्यात्मिक नियंत्रण का प्रतीक बन गया है, जहाँ भावनाओं या इच्छाओं को रोका जाता है। यह तनाव और मुक्ति की कोशिश का चित्रण करता है।

'क़बिज़' का उपयोग कवि अक्सर भावनात्मक नियंत्रण और इच्छा और संयम के बीच आंतरिक संघर्ष की थीम को उजागर करने के लिए करते हैं। यह उन शब्दों के विपरीत है जो स्वतंत्रता या मुक्ति का संकेत देते हैं, मानव आत्मा के भीतर के तनाव को उजागर करते हैं।

कविता की दुनिया में, 'क़बिज़' पकड़ने और छोड़ने के बीच की नाज़ुक संतुलन को पकड़ता है। यह दिल की मौन लड़ाइयों की बात करता है।