Meaning of

क़हर

qahr • قہر

क्रोध; प्रकोप

wrath; fury

قہر; غضب

Arabic

तुम तो घर में थे तुम्हें क्या होगा मालूम
रात भर बरसात ने क्या क़हर ढाया

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वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा
क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर

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दर्द के दरिया से इक रिश्ता निभाना रह गया
मेरे बस में ख़ामुशी का क़हर ढाना रह गया

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वो इक नदी जो कभी तेज़-तेज़ बहती थी
वो आज रेत के मैदान सी बिछी हुई है

मैं इक दरख़्त था 'अशरफ़' किसी ज़माने में
खिज़ां के कहरस अब ठूँठ ही बची हुई है

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लोग कहते है कि ज़हर होता है इश्क़
फिर भी हमें हर पहर होता है इश्क़

हमें इश्क़ ख़ुदा की इबादत लगती है कभी
कभी लगा, ख़ुदा का कहर होता है इश्क़

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तू दूर जा के बैठा है तो इक क़यामत सी है गर
तू पास होता यार तो क्या क़हर मुझ पे टूटता

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नहीं मिलता अगर वो है
नहीं जाता असर वो है

कई आँखें बुझी उस में
बहुत ज़्यादा कहर वो है

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इश्क़ के नुक़्ते ने ढाया है जो कहर
ज़िस्तो-क़ज़ा के ज़ेर-ज़बर ख़त्म हुए

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इक तन्हा ज़िंदगी है बस क़हर बन रही है
जो ज़ख़्मों की दवा थी अब ज़हर बन रही है

सोचा ख़याल था इक थे दर्द कुछ दिखाने
जो शा'इरी लिखी है तो बहर बन रही है

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हुआ करती है शैतानों के मज्लिस में ये सरगोशी भी अब अक्सर
अजब ही कहर ढा रक्खा है नाम-ए-इश्क़ पर इन हुस्न वालों ने

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तुम तो घर में थे तुम्हें क्या होगा मालूम
रात भर बरसात ने क्या क़हर ढाया

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वो क़हर था कि रात का पत्थर पिघल पड़ा
क्या आतिशीं गुलाब खिला आसमान पर

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'क़हर' क्रोध और विनाश की प्रबल शक्ति को दर्शाता है। कविता में यह अक्सर भावनाओं की अनियंत्रित शक्ति का प्रतीक होता है, जो भीतर के तूफान को दर्शाता है जो सृजन और विनाश दोनों कर सकता है।

कवि 'क़हर' का उपयोग मानव भावनाओं की तीव्रता को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की प्रबलता या क्रोध की विनाशकारी शक्ति का प्रतीक हो सकता है।

कविता में 'क़हर' भावनाओं की द्वैत प्रकृति को पकड़ता है, जो सृजनात्मक और विनाशकारी दोनों है।