Meaning of

क़लन्दर

qalandar • قلندر

सूफी; फकीर

mystic; wanderer

صوفی; فقیر

Persian

बाज़ार में नसीब का सिक्का जो चल पड़ा
आक़िल मिलेगा पैर पे बैठा गँवार के

ग़म छोड़ते नहीं हैं मिरा साथ और मैं
बैठा हूँ इंतिज़ार में कब से बहार के

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खद्दर पहन के बेच रहा था शराब वो
देखा मुझे तो हाथ में झंडा उठा लिया

मैं भी कोई गँवार सिपाही न था जनाब
मैं ने भी जाम फेंक के डंडा उठा लिया

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सियासतों ना क़लंदरों के ना माल-ओ-ज़र या सिंगार आगे
झुकेगा सर अपना सिर्फ़ रोज़ी या दीद-ए-परवर-दिगार आगे

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हम क़लंदर-मिज़ाज हैं 'ज़ामी'
हम कनाअत-शिआर होते हैं

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दुनिया-ए-सुख़न का मैं क़लन्दर नहीं होता
गर पेशे नज़र मीर का दफ्तर नहीं होता

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गर क़लंदर है तो फिर अवसर बना
आसमाँ को छत ज़मीं को घर बना

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ख़ुद ही अपना ध्यान रखना है मुझे
इश्क़ में मैं भी क़लंदर था कभी

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तुझ को नहीं पता तो बता दूँ कि ऐ रक़ीब
शाहों का शाह हूँ मैं क़लन्दर हूँ जान ले

वो आग है कि तू उसे छूने से ख़ौफ़ खा
बाक़ी रही मेरी तो मैं 'सागर' हूँ जान ले

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बाज़ार में नसीब का सिक्का जो चल पड़ा
आक़िल मिलेगा पैर पे बैठा गँवार के

ग़म छोड़ते नहीं हैं मिरा साथ और मैं
बैठा हूँ इंतिज़ार में कब से बहार के

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खद्दर पहन के बेच रहा था शराब वो
देखा मुझे तो हाथ में झंडा उठा लिया

मैं भी कोई गँवार सिपाही न था जनाब
मैं ने भी जाम फेंक के डंडा उठा लिया

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क़लन्दर एक मुक्त आत्मा की भावना को दर्शाता है, जो सांसारिक बंधनों से मुक्त है। कविता में, यह सत्य की खोज और सरलता को अपनाने का प्रतीक है।

कवि क़लन्दर का उपयोग आध्यात्मिक यात्राओं की छवियों को उभारने के लिए करते हैं। यह भौतिकवाद के विपरीत है और आंतरिक शांति और ज्ञान का भाव उत्पन्न करता है।

क़लन्दर हमें अपने बोझ को छोड़ने और भीतर की दिव्यता को खोजने के लिए आमंत्रित करता है। यह अज्ञात की सुंदरता को अपनाने का आह्वान है।